
विधा:–गीत
शीर्षक:–रक्षाबंधनभईया तेरी कलाई पर सजती रहें राखी।
कोई राखी न हो ऐसा मेरी खाली जायें राखी
सूनी कलाई का न हो रक्षाबंधन।भाई तेरी कलाई पर बाँधा जो धागा हैं।
धागों का यह बंधन प्यार है बहना का ।
सूनी कलाई का न हो रक्षाबंधन।।बहना तेरी राखी ये मेरी कलाई की शोभा हैं।
शोभा ये कलाई पर बहना ये सजती रहें।
सूनी कलाई का न हो रक्षाबंधन।बहना की दुआ भईया राखी में समाई हैं।
हर धागों में भईया आशीष समाया हैं।
सूनी कलाई का न हो रक्षाबंधन।।बहना तेरी राखी का हर धागा न्यारा हैं।
ये बंधन बहना मेरी हर बंधन से प्यारा हैं
बहना मेरे जीवन में न राखी हो ऐसा
सूनी कलाई का हो कोई रक्षाबंधन।।बंधन तेरी राखी का कमजोर न होने दूँ
बहना इन धागों का हर ऋण चुकाना हैं।
रिश्तों की कहानी में अनोखा रिश्ता निभाना हैं।।
सूनी कलाई का न हो रक्षाबंधन।।स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




