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हर हाल में ज़िंदगी

हर हाल में ज़िंदगी
हर हाल में ज़िंदगी को गले लगाइए।
कभी खुशी, कभी ग़म — ज़िंदगी के दो पहलू।
कभी तो हँसाए, कभी तो रुलाए,
अजब ग़ज़ब है ज़िंदगी मेरी।
हँसकर गले लगाइए,
काँटों भरी राहों में फूल उगाइए।
संघर्ष भरी ज़िंदगी है तो
अपने को आज़माइए।
कठिन परिश्रम से अपने को ऊपर उठाइए,
ज़िंदगी को उन्नति के राहों पर लाने के लिए
अपनी मेहनत का फूल उगाइए।
फिर भी ज़िंदगी तुझे लाज न आई,
मेरी खुशी रास न आई।
कल तक जो बहार थी छाई,
आज ये उजाड़ हो आई।
यूँ ही मैं तो मरा,
पर मारने की तुझे कोई रीत नहीं आई।
ज़िंदगी तुझे आस न बनाई,
मुझे बचाने पास न आई।
फिर भी जीने का हौसला रखूँगी,
हर दर्द को मुस्काकर सहूँगी।
हर हाल में विश्वास जगाऊँगी,
ज़िंदगी को फिर से अपनाऊँगी।
— नीलम प्रभा सिन्हा




