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शिव आराधना

                      "शिव और शक्ति"

🙏🙏🙏🙏🙏शिव आराधना🙏🙏🙏🙏🙏

                            “शिव और शक्ति”

 

शिव आराधना कर, देवों संग दानवगण भी बने महान।

प्रथमतया शिव आराधना कर, पार्वती पाईं अभय दान। 

सदा शिव और शक्ति का, मिलित रूप हुए ब्रह्मस्वरूप।

कैलाशपति, महास्वयंभू, नटराज अनेक हैं इनके रूप।

समस्त वर्णों का अतीता, सदाशिव त्रिगुणात्मक गुणवान।

अधिष्ठाता, ऊर्ध्वरेता ऊर्ध्वतन, अवस्थिता प्राणों के प्राण।

स्तुति-निंदा विरहिता, पंच तत्व स्वरूपिणी माँ प्रणम्य है।

वैखरी आदिशक्तिस्वामि, स्वयंभूउद्गम दिव्यज्योतिर्लिंग है।

आकाश से वायु, वायु से सूर्य, सूर्य से जल तत्व सृष्ट है।

जल से सप्तलोक, त्रिलोक व भूमण्डल अभिव्यक्त है। 

पञ्चतत्व आकाश – वायु- अग्नि- जल- पृथ्वी से।

चराचर, जड़- चेतन; संपूर्ण ब्रह्माण्ड सृष्ट शिव से।

ब्रह्माण्ड की रक्षार्थ, कूर्मपीठ पर, देवाधिदेव रहते।

सलील में कूर्म नित्य, चहुँओर विचरण करते रहते।

सत्य लोक में, निर्विकार महाज्योतिर्लिंग स्वरूप।

त्र्यंबकेश्वर, नीलकंठ, महास्वयंभू अनेक हैं रूप।

महाशक्ति आदिशक्ति माया, आवृत कर विराजमान।

उन्हीं आदिशिव से समस्त ब्रह्माण्ड उत्पन्न, वर्तमान।।

 

डॉ. कवि कुमार निर्मल

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