
शुभ बुधवार २६/०८/२६
————————— # राखी
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खुशियों से मन झूम रहा है !अधरों पर मुस्कान सजी है !
पावन सावन पुर्णिमा को त्योहार आई है !
आज न रहेगी सूनी कलाई भैया… !!
तेरे भाल का लाल तिलक चमकता रहे मेरे भैया !!
भाभी की सुहाग सिंदूर दमकती रहे भैया !!
मेरे हाथ की ये रक्षाबंधन की सूत राखी कहती है भैया !!
भाई – बहन का पावन पर्व है भैया !!
भाई सदा प्रगति पथ पाए !
संकट उस तक कभी पहुँच न पाए !
वचन निभाना मेरे भैया !!
तेरी सौभाग्यवती बहना का मान बना रहे !
पीहर उसका सजा रहे !!
स्नेह – दीप की ज्योत से घर आँगन जला रहे !!
इस पावन पर्व को भैया !!
दिखावे से दूर ही रखना !
धर्म, संस्कारों से बनी ये कच्ची सूत की डोर तेरे मेरे स्नेह का पावन डोर है भैया !!
भेदभाव यह डोर नहीं जानती !
मूल्यवान तो नहीं है ये डोर मेरे भैया !!
पर जन्म से जुड़ा है ये !
जन्मदाता के आशीर्वाद हम हैं !
उनके रक्त कण के प्रसाद हम हैं !!
पवित्र डोर की मान सम्मान हम हैं !!
घर हम तेरे कुछ लेने नहीं आते …. !
सौभाग्यवती हम अपने घर के !
मान मर्यादा से आते हैं !!
आशीर्वाद यही देते हैं मेरे भैया !!
सदा खुशहाल रहे मेरा पीहर !!
हँसता रहे मेरा भैया !!
भाभी की खनकती रहे चुड़ियों से कलाई !!
भैया के कलाई में मेरे नाम की राखी की डोर बंधी रहे !!
विजयी तिलक तेरे भाल पर अपने हाथों से लगांऊ !!
प्रेम स्नेह की पोटली आंचल में भर कर अपने घर आऊं !!
पावन बंधन सदा हम भाई – बहन निभाये !!
कभी सूनी न रहे तुम्हारी कलाई !!
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुम्बई




