15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवस

15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवस
लंबी बेड़ियों में जकड़ी थी भारत माता,
आया पंद्रह अगस्त, मिली हमें स्वतंत्रता।
कितनों ने अपना सर्वस्व गँवाया,
तब जाकर मिली यह अमूल्य स्वतंत्रता।
कहने भर से नहीं मिलती है स्वतंत्रता,
इसके लिए हर व्यक्ति को संघर्ष करना पड़ता है।
तन से, मन से और बुद्धि से लड़ना पड़ता है,
तभी विजय का सूरज उगता है।
लाल रंग से रंग गई थी यह धरा,
यह किसके रक्त का रंग था, कोई समझ न पाया।
अमन की धरती पर यह कैसा दृश्य था,
क्यों चल पड़ी थी नफ़रत की आँधी?
फाँसी के फंदों पर झूल गए देश के नवयुवक,
हम सभी उन्हें धीरे-धीरे भूलते चले गए।
वे हमारी आज़ादी की लड़ाई का अभिन्न हिस्सा थे,
फिर भी उनके बलिदानों का मूल्य हम कभी नहीं चुका पाए।
आज स्वार्थ अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया है,
देखते ही देखते समाज दो विचारधाराओं में बँट गया है।
हर व्यक्ति स्वतंत्र है और स्वतंत्र रहे,
पर अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग सद्विचारों के साथ करे।
आज़ादी की लड़ाई में हमें स्वतंत्रता मिली,
फाँसी के फंदों पर निडर सेनानी झूल गए।
उनके बलिदानों को कितनी जल्दी हम भूल गए।
हमारा देश हमसे बहुत कुछ अपेक्षा करता है।
आइए, अच्छे नागरिक बनें और इस अमूल्य स्वतंत्रता का सम्मान करें।
भेदभाव छोड़कर देश की उन्नति में हाथ बटाएँ,
ना कुछ मेरा, ना कुछ तेरा—
मिलकर भारत का परचम विश्व में लहराएँ।
— नीलम प्रभा सिन्हा




