माँ शारदे के सपूत प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता , साहित्कार महान कवि, दार्शनिक रविन्द्र नाथ टैगोर जी ने कहा था:- दूरी तन की हो सकती है, मन की नहीं।

माँ शारदे के सपूत प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता , साहित्कार महान कवि, दार्शनिक रविन्द्र नाथ टैगोर जी ने कहा था:- दूरी तन की हो सकती है, मन की नहीं।
मैं श्यामा अपने शब्दों की पुष्पाजंलि से काबुलीवाला के रूप में गुरुदेव के जयंती विशेष पर उनके चरणों में अर्पित करती हूं🙏🏻🙏🏻💐💐🙏🏻🙏🏻
०७/०८/२६, शुक्रवार
काबुलीवाला
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घूम घूम कर बेच रहा था
जोर जोर से आवाज लगाता
बादाम , किशमिश, अंजीर .. ले.. लो…
वहीं छोटी बच्ची चहकती हुई तुतलाते बोली:
माँ ! माँ, काबुलीवाला आया..
बड़ी सी थैली और लंबी दाढ़ी
उसकी थैली में न जाने कितनी सारी चीज भरी थी । पर नन्हीं बिटिया की चहकती आवाज पर रुका ऐसा लगा जैसे कि उसकी अपनी बिटिया मिनी की हँसी जैसी बस उसके पास गया और धीरे से पूछा: – क्या नाम है गुड़िया प्यारी..?
मैं तो बिटिया हूँ पापा की.. वो भी चहकती हुई बोली ।
एक पल उस बिटिया की आवाज सुन्कर उसकी आँखे भर आई ,
अपनी मिनी बिटिया को छोड़कर बहुत दूर निकल आया ।
यादों की डोली को वहीं छोड़ आया।
कुछ पल उन्हीं यादों की डोली में डुबा रहा कैसे मिनी ऐसे दौड़कर आती थी… अब्बा कहकर गले से लिपट जाती थी।
उसने कुछ न बेचा आज और न कुछ खरीदा
बस उस चहकती गुड़िया बिटिया की हँसी में अपनी प्यारी मिनी पाया ।
उसकी यादों को टोकते बोली
कल फिर आना काबुलीवाला काका !
कुछ रिश्ते ऐसे भी होते जो प्रेम भाव से बनते हैं ।
मन से हो जुड़ जाते हैं।
गुड़िया और मिनी सब एक जैसे ही बच्चें है। कुछ परिवार संग रहते हैं। कुछ …. दुरी में रहते हैं।
बच्चें के निर्मल प्रेम से सब मोहित हो जाते हैं।
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुम्बई




