E-Paperसाहित्यिक गतिविधियां

विषय: सत्य के राही _डॉ. अंजली सामंत

विषय: सत्य के राही

_डॉ. अंजली सामंत, महाराष्ट्र

 

सत्य के अनुगामी राजा हरिश्चंद्र ने  

स्वप्न में भी अपना राजपाट दान कर दिया।  

कर्ण ने कवच-कुंडल का दान किया,  

माता के वचन का पालन करने राम वनवास गए॥1॥

 

वेदों में, उपनिषदों में, पुराणों में  

तथा इतिहास में सत्य के अनुगामी महान हुए हैं।  

उज्ज्वल और श्रेष्ठ है हमारी संस्कृति,  

प्रत्येक घर में उच्चतम संस्कार विद्यमान हैं॥2॥

 

आज लोग कहाँ भटक गए हैं?  

असत्य का ध्वज धारण करके  

असत्य के मार्ग पर चल रहे हैं,  

और क्षणिक सुख में आनंद मान रहे हैं॥3॥

 

मानव का अलंकार है सत्य-वचन।  

चाहे लाख प्रयत्न किए जाएँ सत्य को मिटाने के,  

सत्य न कभी मिटता है, न टूटता है।  

सत्य अटल है, शाश्वत है, कल्याणकारी और शिव-स्वरूप है॥4॥

 

सत्य के मार्ग में कंटक अवश्य होते हैं,  

किंतु सत्य के पथिक कभी विचलित नहीं होते॥5॥

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!