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मुक्ति का मार्ग 

मुक्ति का मार्ग 

 

वेदों ने सत्य-धर्म की राह दिखाई,

कर्मों को निष्काम बनाओ।

उपनिषदों ने आत्मज्ञान का दीप जलाया,

 भीतर प्रभु को पाओ।

 

पुराणों ने भक्ति, सेवा, सदाचार

का सुंदर संदेश सुनाया।

सत्कर्मों से मन को निर्मल कर,

जीवन का पथ समझाया।

 

बुद्ध ने कहा—करुणा रखो, 

तृष्णा का बंधन त्याग करो।

अहिंसा, सत्य, सम्यक् कर्म से

जीवन का उद्धार करो।

 

महावीर ने संयम सिखाया,

जीव-दया को धर्म बताया।

अपरिग्रह और आत्म-विजय से

 मुक्ति का पथ समझाया।

 

लोभ-मोह के जाल से निकलो,

मन में शांति जगाओ।

क्रोध, अहंकार और द्वेष त्यागकर

प्रेम-सुधा बरसाओ।

 

ज्ञान, ध्यान और सदाचार से

अंतरतम उजियारा हो।

सत्य-अहिंसा की राह पकड़कर

जीवन सफल तुम्हारा हो।

 

नहीं मुक्ति केवल वन जाने या

जग से दूर हुए में है।

मुक्ति तो निर्मल मन,

सत्कर्म और आत्मबोध के नूर में है।

 

जिसने अपने भीतर जीता, 

वही भवसागर पार हुआ।

वेद-बुद्ध-महावीर की राह चला,

उसका जीवन सार हुआ।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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