घुनवारा में नशे का बढ़ता जाल: सवाल सिर्फ गांजे का नहीं, एक पीढ़ी के भविष्य का है

घुनवारा में नशे का बढ़ता जाल: सवाल सिर्फ गांजे का नहीं, एक पीढ़ी के भविष्य का है
संवाददाता राहुल द्विवेदी
मैहर जिले के घुनवारा में गांजे और नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर सामने आ रही चर्चाओं ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या नशा अब यहां सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक संकट बन चुका है?
घुनवारा मे गांजे की पुड़िया वितरित करने वालो मे राजेश सोनी मुन्ना, दद्दू लाल साहू और धौरा साहू के नाम गांजे के कथित कारोबार या नशे के फैलाव से जोड़कर चर्चाएं हो रही हैं। सोचिये जरा इन नशे के सौदागरो के द्वारा युवाओं और आम लोगों तक नशा पहुंच रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और प्रशासन को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
गांजा किसी व्यक्ति को रातों-रात मानसिक रूप से विकलांग नहीं बनाता, लेकिन लगातार और अत्यधिक नशे की आदत मानसिक स्वास्थ्य, स्मरण शक्ति, एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक व्यवहार पर गंभीर असर डाल सकती है। सबसे ज्यादा चिंता युवाओं को लेकर है, क्योंकि नशे की शुरुआत अक्सर शौक से होती है और धीरे-धीरे आदत और फिर लत में बदल जाती है। ऐसे ही कई युवा मानसिक रोगी हो गये है जो दिन रात गांजे के नशे मे चूर रहते है
घुनवारा में यदि नशे का कारोबार जड़ें जमा रहा है तो सवाल केवल पुलिस की कार्रवाई का नहीं है। सवाल यह भी है कि नशा बेचने वालों तक माल पहुंच कैसे रहा है? खरीदने वालों में कौन-कौन हैं? युवाओं को इसकी गिरफ्त में कौन ला रहा है? और अब तक जिम्मेदार ने क्या कार्रवाई की?
किसी गांव या कस्बे की पहचान उसके स्कूलों, बाजारों, खेल मैदानों और मेहनतकश लोगों से होनी चाहिए—न कि इस बात से कि वहां नशा कितनी आसानी से उपलब्ध है।
जरूरत है कि पुलिस और प्रशासन घुनवारा में नशे के स्रोत, सप्लाई चैन और कथित तस्करों की भूमिका की गंभीरता से जांच करे। साथ ही स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान, परिवारों की भागीदारी और नशा छोड़ने वालों के लिए परामर्श की व्यवस्था भी हो।
क्योंकि नशे का कारोबार केवल एक व्यक्ति की जेब नहीं भरता—यह धीरे-धीरे एक परिवार की खुशियां, एक युवा का भविष्य और पूरे समाज की दिशा छीन सकता है।
घुनवारा को गंजेड़ियों का गांव बनाने की कोशिश अगर कहीं हो रही है, तो अब सवाल यह नहीं कि कौन बेच रहा है—सवाल यह है कि उसे रोक कौन रहा है?
प्रशासन को चाहिए कि आरोपों की निष्पक्ष जांच करे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के तहत कठोर कार्रवाई करे। वहीं समाज को भी चुप रहने के बजाय नशे के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
क्योंकि आज अगर गांजे की पुड़िया पर सवाल नहीं उठाया गया, तो कल किसी घर का बेटा अपने भविष्य की कीमत चुका सकता है।




