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शीर्षक:–सावन लगता है मनभावन

शीर्षक:–सावन लगता है मनभावन

 

आया आया सावन आया

बादलों का छाँव लाया।

तपती धरती झूलस रहीं

बिन पानी प्यासा हर जीव

घन घनेरे तिमिर लाया

छम छम करके बरसे मेघ

इंद्रधनुष से सज गया अंबर

नदियों का दिखें रुप यौवन

अवनी करें श्रृंगार

सावन बन आया सावन।

लेकर खुशियों का सौगात।

सावन लगता हैं मनभावन।।

 

तीज त्योहार का हुआ आगमन

महादेव का सावन सोमवार 

नागपंचमी हरियाली तीज

भाईबहन का अनोखा बंधन

बाँधे बहना रेशम की डोर

सावन जैसे रिश्तों का संगम

प्रेम का हैं ये बंधन।।

खुशी से झूम उठें किसान

जन जन में जागें उमंग ।।

वन्य जीव सब को दें नवजीवन।

बागों में पड़ गए झूलें

सखियाँ गायें गीत मल्हार।।

सावन क्यों न लगें मनभावन।।

 

स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा

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