E-Paperसाहित्य रचना

विषय : हरियाली तिरंगा

 

विषय : हरियाली तिरंगा

मेरा देश, मेरी माटी

मेरा देश, मेरी माटी,
यही है मेरी जिंदगानी।
प्राचीन संस्कृति से समृद्ध,
अद्भुत इसकी प्रकृति सुहानी।

कल-कल करती नदियाँ बहतीं,
धरती ओढ़े हरियाली।
वृक्ष, लताएँ, नव पल्लव से,
सजती भारत की हरियाली।

विशाल मातृभूमि की गोदी,
सबको देती सुख-सम्मान।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
मिलकर बनते हिंदुस्तान।

तिरंगा लेकर हाथों में,
वीरों ने दी अपनी जवानी।
उनके त्याग और बलिदान की,
अमर रहे गाथा सुहानी।

केसरिया त्याग सिखाता है,
श्वेत शांति की देता वाणी।
हरा रंग समृद्धि का द्योतक,
चक्र बढ़ाए गति मनमानी।

सम्मान भारत माँ का करें हम,
प्रेम-स्नेह से कदम बढ़ाएँ।
माँ का वैभव कभी न भूलें,
राष्ट्रप्रेम का दीप जलाएँ।

भारत माँ की उर्वर माटी,
कुसुम-लता नव पल्लवित हो।
हर आँगन हरित-भरा हो,
जन-जीवन सुख से विकसित हो।

हरित धरा पर लहराए तिरंगा,
गूँजे भारत की जयगानी।
मेरा देश, मेरी माटी,
यही है मेरी जिंदगानी।

अमिता मराठे
लेखिका व समाज सेविका
इंदौर मध्य-प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!