शीर्षक: माँ तेरी लोरी में देशभक्ति

शीर्षक: माँ तेरी लोरी में देशभक्ति
अंजली सामंत
माँ, तेरी लोरी सुनकर हम बड़े हुए।
गुलामी की पीड़ा तूने बार-बार सुनाई।
रामलला और कृष्ण कन्हैया का नटखट बचपन,
वीरता से भरी कथाएँ तूने सुनाईं॥1॥
छत्रपति शिवाजी महाराज के
‘हिंदवी स्वराज’ का स्वप्न भी बताया।
माँ, तेरी लोरी में वीरता और
राष्ट्रप्रेम की धारा थी॥2॥
सर पर कफ़न बाँधकर
दादा, मामा और पिता जी
तेरे भरोसे घर से निकल पड़े थे।
लोकमान्य तिलक, नेताजी सुभाषचंद्र बोस,
लाल, बाल, पाल और वीर सावरकर की
क्रांतिकारी गाथाओं ने
हमारे हृदय में देशभक्ति का दीप जलाया॥3॥
माँ, तेरी लोरी में मातृभूमि की पुकार थी।
महात्मा गांधी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का उद्घोष किया।
सन् 1942 में संपूर्ण भारत
राष्ट्रभक्ति के तेज से जाग उठा ।।4॥
वीरों, वीरांगनाओं और शहीदों के
रक्त की नदियों से हमने स्वतंत्रता प्राप्त की।
माँ, तेरी आजादी की लोरी सुनकर
हमारी आँखें भर आती थीं।
तूने ही हमें हमारा गौरवशाली इतिहास पढ़ाया था॥5॥
अब हमारे जीवन-मरण का उद्देश्य
केवल देश की सेवा है।
तिरंगा हमारी शान, हमारा स्वाभिमान है।
वह हमें प्राणों से भी प्रिय है।
तिरंगे में लिपटकर शहीद होने का सौभाग्य मिले,
यही हमारी अंतिम अभिलाषा है॥6॥




