15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवसE-Paperसाहित्य रचना
शीर्षक -सरहद पर जाऊंँगा

शीर्षक -सरहद पर जाऊंँगा!
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माँ मैं भी सरहद पर जाऊँगा,
सैनिक बनकर देश का मैं,
दुश्मन को मार भगाऊंँगा।
भगत,आजाद बन जाऊँगा,
भारत माँ के चरणों सदा,
अपना शीश झुकाऊंँगा!
कभी पड़ी मुसीबत देश पर,
तो दुश्मन से लड़ जाऊँगा।
दुश्मन के छक्के छुड़ाने को,
उसका काल बन जाऊँगा।।
यह माँ तुमसे वादा करता हूंँ,
दुखी किसी को ना होने दूँगा।
देश पर जब भी संकट होगा,
मर कर भी फर्ज निभाऊँगा।
मुझको तुम बंदूक दिला दो,
माँ! में सरहद पर जाऊँगा।
मातृभूमि की रक्षा करने को,
मैं दुश्मन से लड़ने जाऊँगा!!
सुषमा सिंह*उर्मि,,




