15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवसE-Paperसाहित्य रचना
ए वतन तेरे लिए

🙏ए वतन तेरे लिए🇮🇳
ए वतन तेरे लिए हम मुस्कुराते जाएँगे,
देश की खातिर सदा शीश झुकाते जाएँगे।
तेरी मिट्टी की महक दिल में बसा कर रखेंगे,
तेरे मान-सम्मान को सबसे बड़ा हम रखेंगे।
वीर सैनिकों की गाथा जग को सुनाएँगे,
तिरंगे की शान को नभ तक उठाएँगे।
जाति-धर्म के भेद सारे भूलकर हम साथ हों,
देशहित के रास्ते पर एक होकर साथ हों।
ज्ञान की ज्योति जलाकर अज्ञान दूर भगाएँगे,
मेहनत से भारत को आगे बढ़ाएँगे।
गंगा-जमुनी संस्कृति का मान बढ़ाते जाएँगे,
प्रेम और सद्भाव के दीप जलाते जाएँगे।
ए वतन तेरे लिए हर खुशी कुर्बान है,
तू सलामत रहे सदा, यही दिल की अरमान है।
तेरी आन-बान-शान पर सब कुछ लुटाते जाएँगे,
भारत माँ के चरणों में जीवन सदा सजाएँगे।।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा’ सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




