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“आत्मविश्वास”

” आत्मविश्वास”
यह आसमा छिन गया तो क्या
नया ढूंढ लेंगे,
हम वह परिंदे नहीं जो ,
उड़ाना छोड़ देंगे।
मत पूछ हौसले हमारे,
आज कितने मजबूत है,
एक नई शुरुआत, नया आरंभ तय हैं, हम वह परिंदे नहीं ,जो उड़ना छोड़ देंगे,
मानाअभी हम नि:शब्द है,
यह मंजिल छूट गई, तो क्या
नया सागर ढूंढ लेंगे,
हम वह कश्तियां नहीं जो, तैरना छोड़ देंगे!
कदम चलते रहेंगे,
जब तक श्वास है,
परिस्थिति से परे,
स्वयं पर हमें विश्वास है,
एक रास्ता मिला नहीं तो क्या,
न ई राहे, ढूंढ लेंगे,
हम वह मुसाफिर नहीं जो,
चलना छोड़ देंगे,
यह मुकाम नहीं हासिल तो क्या?
नये ठिकाने ढूंढ लेंगे,
हमको शख्स नहीं जो,
अपनी तलाश छोड़ देंगे,
हम वह परिंदे नहीं जो,
उड़ना छोड़ देंगे, हम वह परिंदे नहीं जो, उड़ना छोड़ देंगे।।
श्वेता ईनाणी ,उदयपुर,लेखिका , समाज सेविका




