शीर्षक -भारत माँ के लाल!

शीर्षक -भारत माँ के लाल!
दिनांक -09/08/26
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भारत मांँ के लाल तुम,पथ पर बढ़ते जाना।
जो भी पथ में बाधा आए,हंस कर पार
सभी कर जाना।।
तुम वीरों में हिमगिरि सी ऊंँचाई,
और सागर सी गहराई है।
लहरों सी तरंगें और , सूरज की तरूनाई है।।
जब भी देश पर संकट आया,
देश लिए संघर्ष किया।
दुश्मनों को मार भगाया, जग में अपना नाम किया।।
भारत मांँ के लाल हो, रक्षा सदा करना तुम।
चांँद बनकर वीर सपूत,शेर सी गर्जना करना तुम।।
पहली मांँ है मातृभूमि,पहरा देकर सेवा करते।
अपनी जान न्यौछावर कर, भारत की
रक्षा करते।।
अपनी कोई परवाह नहीं, पहले आता देश है।
दुर्गमता के कांँटों का पथ, आघात सहे कई तुमने है।।
हमारा प्यारा देश अनेकता में,
एकता की जग में मिसाल है।
सभी धर्मों के लोग मिलके रहते,
तभी वसुधैव कुटुंबकम कहलाए है।
मेरे देश के रणबांकुरों, शेरों, तुमसे
ही है वतन।
हम भारत वासी तुम सैनिकों को,
करते हैं सहस्त्रों नमन!!
जय हिन्द -जय भारत
वन्देमातरम
सुषमा सिंह”उर्मि,,
कानपुर




