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शीर्षक:राह, नया उजास

शीर्षक:राह, नया उजास

 

बदलाव तभी सार्थक है, जब सोच नई हो जाए,

मन में आशा का दीप जले, हर राह सरल हो जाए।

 

बीते कल की भूलों से हम, सीखें आगे बढ़ना,

निराशा के अँधियारे में, आशा बनकर लड़ना।

 

छोटी-सी कोशिश भी जग में, बड़ा असर कर जाती,

एक किरण तम हर लेती है, नई सुबह बन जाती।

 

कटुता छोड़ प्रेम अपनाएँ, मन में करुणा भर लें,

स्वार्थ भुलाकर मानवता के, सुंदर पथ पर चल लें।

 

बदलें अपनी दृष्टि पहले, बदलेगा संसार,

सद्विचार से खिल उठेगा, जीवन का हर द्वार।

 

नारी, युवा, किसान, श्रमिक—सबको मिले सम्मान,

शिक्षा, श्रम और सत्य बने, उन्नति की पहचान।

 

परिवर्तन का अर्थ यही है—बेहतर कल की चाह,

अपने भीतर दीप जलाकर, खुद बन जाएँ नई राह।

 

जब मिलकर हम कदम बढ़ाएँ, मिटे सभी अँधियारा,

सकारात्मक सोच से सजता, सुंदर जग हमारा।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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