विषय:–जेल की सलाखों से आजादी तक

विषय:–जेल की सलाखों से आजादी तक
विधा:–काव्य
शीर्षक:–वीरों का संघर्ष
जेल की सलाखों से आजादी तक का सफर।
दर्द पीड़ा अत्याचार जुल्मों का सितम।।
खाते रहें कोड़े चढ़े शूली पर
हँसते हँसते शीश अपनी कर दिया कुर्बान।
बड़ी कीमत देकर देश हुआ आजाद।।
भूल मत जाओं नादाँ नौजवान।
भारत माँ के प्यारे लाल हो गए शहीद।।
खाई किसी ने गोली अपने सीने पर।
हर जुबां बोल रहा था बंदेमातरम।।
राजगुरु सुखदेव भगत का प्रचंड।
लाल बाल पाल का संघर्ष दर संघर्ष।।
आजाद सुभाष बिस्मिल हुए क्रांतिवीर।
नीरा बसंत जतिन जैसे वीर हुए महान।।
कुँवर सिंह बोस जूनूनी था हर खून ।
चहूँओर गूंज रहा था इंकलाब जिंदाबाद।।
रज रज के कण कण से आती थी आवाज।
स्वराज हमारा जन्मसिद्ध है अधिकार।।
अँग्रेजों भारत छोड़ो थी जन जन की आवाज।।
खुशनुमा दिवस आया देश हुआ आजाद।
जाते जाते कह गए भारत माँ के लाल।।
लूटेरा कोई लूट न पायें देश का सम्मान।
रखना देशवासी आजादी को संभाल।।
वीरों का संघर्ष न हो कभी बदनाम।
दामन किसी माँ का न हो लहूलुहान।।
फिर न कोई उजड़े घर हो हर घर खुशहाल।
बहनों की रक्षा करना बनकर रक्षक।।
जेल की सलाखों से आजादी तक का सफर।
लहरा कर तिरंगा सफर हुआ अंत।।
स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




