ऊॅं से सृष्टि सृजित किए हैं शिव

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ऊॅं से सृष्टि सृजित किए हैं शिव
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ऊॅं से सृष्टि सृजित किए हैं शिव,
ओमकार ध्वनि से बनें हैं त्रिदेव।
त्र्यंबकेश्वर कहलाए हैं शिवजी,
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में महादेव।।
बारह राशि को बारह महीने में,
तृप्त करें पर श्रावण मास श्रेष्ठ।
यथा शक्ति इष्ट परोसे संसाधन,
तभी तो शिव सब देवों में यथेष्ट।।
महादेव कहलाते हैं भोले-बाबा,
महाकाल को भाते हैं अंत चिता।
भभूति लगाते हैं सबसे पावन वे,
श्मशान में रहते हमारे परमपिता।।
जन्म-मृत्यु बीच जीवन मायावी,
आकर्षक जहाॅं है अग्नि परीक्षा।
ब्रह्मचर्य,गृहस्थ,वानप्रस्थ,के संग,
संन्यास आश्रम के करते समीक्षा।।
लौकिक दृश्य शोभायमान जग,
अलौकिक शिवमय वातावरण।
जीव भी सूक्ष्म शिव अंश समझें,
जो रहे तो जीवन नहीं तो मरण।।
माया-योह में जड़ रहते निर्लिप्त,
वही पवित्र आत्मा उभर आता है।
शिवमय जीवन गुजार वही फिर,
सहज परमात्मा के डगर जाता है।।
सावन सोमवार ही सबसे खास,
मोहित काशीविश्वनाथ-चंद्रहास।
आशुतोष कहते हर-हर महादेव,
भक्ति से प्रसन्न रखते फिर पास।।
ऊॅं नमःशिवाय भजते हैं साधक,
तो बन जाते शिव के प्रिय जीव।
शिवाय नमस्तुभ्यम् हैं विश्वनाथ,
ऊॅं से सृष्टि सृजित किए हैं शिव।।
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स्वरचित मौलिक रचना संग
सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”
हथखोज / देमार (पाटन)
तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़
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