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सावन की बारिश और प्रेम

 

सावन की बारिश और प्रेम
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सावन की बारिश तन मन को भिगोती
पिया मिलन की आस है जगाती
सच बारिश और प्रियंका अद्भुत है संगम
बारिश में तन भींगता है और मोहब्बत
मे आंखें
ये पल खुशगवार और यादगार हैं होते
रिमझिम बारिश में मोर नाचते, पपीहा गाते
प्रकृति की हरियाली देख हर्षित मन मुस्काते
बारिश की बूंदे पिया तेरी याद दिलाती है
प्यार से भरी बारिश और तुम्हारा साथ चाहिए
हर बारिश की बूंदों मैं तेरा ही अक्स देखती हूं
तेरी मोहब्बत की बारिश में भींग कर इठलाना चाहती हूं
मत पूछो वो यादों का आलम
जहां से उतरता ही नहीं
बारिश की तरह तुम्हें मैं बहुत करीब महसूस करती हूं
आ जाओ पिया अब तो दीदार कर लो
यह बारिश का मौसम इजहार -ए -मोहब्बत कर लो
जब से तुम गए परदेस कैसे बिताई दिन- रैन
बारिश का मौसम भी आ गया
अब तो ना सताओ पिया आ भी जाओ
ये बारिश तन -मन में आग लगाती
आके प्यास बुझाओ ना
ये सावन का बारिश और तुम्हारा प्रेम
मुझे है तड़पाती

डॉ मीना कुमारी परिहार

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