बड़ी कंपनियों के सामने प्रशासन हुआ नतमस्तक– दिलीप मिश्रा
सितपुरा बायो एनर्जी प्लांट से रोजगार के बजाय मिल रहा है प्रदूषण एवं बीमारी --- दिलीप मिश्रा

बड़ी कंपनियों के सामने प्रशासन हुआ नतमस्तक– दिलीप मिश्रा
सितपुरा बायो एनर्जी प्लांट से रोजगार के बजाय मिल रहा है प्रदूषण एवं बीमारी — दिलीप मिश्रा
सितपुरा स्थित रिलायंस बायो एनर्जी प्लांट से कथित रूप से फैल रही दुर्गंध दूषित काले पानी व प्रदूषण के मामले पर जिला कांग्रेस कमेटी सतना-मैहर के पूर्व अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण विभाग व संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। श्री मिश्रा ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से ग्रामीण लगातार प्रदूषण गंदे पानी की शिकायतें कर रहे हैं लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से क्षेत्रीय लोगों का प्रशासन पर भरोसा टूटता नजर आ रहा है। श्री मिश्रा ने कहा है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो बड़ी कंपनियों के सामने जिम्मेदार बेबस या मौन हो गये हैं।श्री मिश्रा ने कहा कि जिस उद्योग से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और विकास की उम्मीद थी उसी के कारण आज कथित रूप से ग्रामीणों के लिए प्रदूषण दुर्गंध और किसानों की परेशानियों का कारण बन गया है। श्री मिश्रा ने आरोप लगाया है कि प्लांट से निकलने वाला काला एवं रासायनिक अपशिष्ट एवं दुर्गंध आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच रही है जिससे खेतों की फसल एवं जनमानस के जनजीवन प्रभावित हो रहा है एवं क्षेत्रीय लोगों को जीना दुर्लभ हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गंध के कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है व सामान्य जन जीवन प्रभावित हो गया है।श्री मिश्रा ने कहा कि यदि आम लोगों की शिकायतों में सच्चाई है तो यह केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य का भी गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वे तत्काल मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच करें व जांच रिपोर्ट रिपोर्ट सार्वजनिक करें। यदि किसी भी प्रकार का पर्यावरणीय उल्लंघन सामने आता है तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।श्री मिश्रा ने मांग की है कि प्रभावित गांवों के जल, मिट्टी और वायु की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराई जाए, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा यदि प्रदूषण से किसानों और ग्रामीणों को नुकसान हुआ है तो उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। श्री मिश्रा ने यह भी कहा कि प्रशासन को कंपनी प्रबंधन से जवाबदेही तय करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।श्री मिश्रा ने सवाल उठाया कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का इंतजार कर रहा है? उनका कहना है कि जनता की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लेना प्रशासन का नैतिक दायित्व है।




