(भजन/भक्ति रचना)E-Paperसाहित्यिक गतिविधियां

त्रिवेणी संगम

त्रिवेणी संगम

 

पावन मास, सावन सोमवार नाग पंचमी पर्व महान,

सावन बरसे,धरती हरसे,शिव देते खुश हो वरदान।

 

सोमवार बेलपत्र चढ़े, नाग देव धरती पर आए,  

दूध और फूल का भोग बढ़े, मनचाहा कृपा को पाएं।

 

शिव के गले का हार है नाग, दोनों की पूजा एक साथ।  

सावन सोमवार नाग पंचमी है, आज का बड़ा ही खास।

 

सावन से धरती हरा, सोमवार मन को शांत रखे,  

नाग पंचमी खेतों की रक्षक है,

तीनों जीवन पावन करे।  

 

नाग देव को मारो मत,शिव के आभूषण नागदेवता, 

त्योहार भी पावन,

भोलेनाथ,नाग देव की कृपा, सावन देते हैं नेवता।

 

तीनों के संगम अति पावन, मंगलमय जीवन करें,

श्रद्धाभाव,बेलपत्र,चांवल से जीवन का उद्धार करें।

 

   चन्द्रकला शर्मा 

   प्रधान पाठक 

 बेमेतरा छत्तीसगढ़

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