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सावन में पुत्रदा पवित्रा एकादशी पावन

सावन में पुत्रदा पवित्रा एकादशी पावन

 

सावन मास की शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी आई,

सावन की हरियाली संग,अति पावन खुश्बू लाई।

 

श्री हरिहर दोनों खुश होते,जब भक्ति से व्रत करते हैं,

शिव सावन,श्री हरि एकादशी संगम पीड़ा को हरते हैं।

 

सावन का पावन पुत्रदा पवित्रा एकादशी व्रत आया,

श्री भगवान विष्णु का व्रत,मन

में श्रद्धा भाव जगाया।

 

तुलसी दल,पीले फूल बिष्णु भगवान को चढ़ाते हैं,

श्री हरि उन भक्तों की वंश को सदा बढ़ाते हैं।

 

जो माता संतान सुख हेतु, व्रत एकादशी को करते हैं,

प्रभु उनके भाव से खुश हो, झोली में खुशियां भरते हैं।

 

एकादशी को निर्जल,फलाहार व्रत उपवास करती है,

उसके घर में खुशियाँ आती व,

सूनी गोदी भरती है।

 

सावन की ये पुत्रदा एकादशी, पवित्र जीवन को करती है,

पावन मास की ये पवित्रा व्रत 

मन के पाप को हरती है‌।

 

ये व्रत केवल पुत्र ही नहीं, पवित्र मन का दर्पण है,

संतान संस्कारी मिलती है जब भाव प्रभु को अर्पण है।

 

 चन्द्रकला शर्मा 

  प्रधान पाठक 

बेमेतरा छत्तीसगढ़

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