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कहती है माँ भारती

कहती है माँ भारती

बनो नव युग के सूत्रधार !

उठो जागो हे देश के कर्णधार

अब तुम्हें भी लेकर निकलना है हाथों में लेकर जलती मशाल ।

उद्घोषक बन कर करो जीवंत नाटक का विचार ।

शत्रुओं को बना लो अपना शिकार ।

थाम लो हाथों में कलम या चमकती तलवार ।

तुम देश के कर्णधार हो!

नवचेतना का आधार हो!

जोश उमंग लहू का संचार हो!

हाथ में थाम लिया जो जलती मशाल ।

रुकने का फिर नाम नहीं…

आगे बढ़ते जाना है।

नव पथ का करो निर्माण !

नव युग की तुम पहचान !

स्वर्णिम अक्षर में लिखना इतिहास के पन्नों पर,

सफलता के शिखर चढ़ना है।

विश्वपटल पर सर्वप्रथम रहना है।

बनना है तुम्हें भी एक मिशाल !

उठो जाओ हे देश के कर्णधार !

बनो नव युग के सूत्रधार !

✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास

      मुम्बई

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