E-Paperसाहित्य रचना
शीर्षक –मौसम तो बदलते

शीर्षक –मौसम तो बदलते
रहते हैं!
दिनांक -20/08/26
——————————-
मौसम तो बदलते रहते हैं,
पर! कहांँ है उसमें बिसात,
जो मेरा पथ बदल दे !
मैंने तो ठाना सत्य की राह
पर ही चलना।
चाहे!कितनी बाधाएंँ,आंँधी ,
तूफान भी आएँ।।
मुझको अटल रहके सदा,
सत्य!पथ में ही चलना।।
हमको बढ़ते जाना और,
मंजिल अपनी पाना है।
सत्य के पथ पर सदा,
हमको कदम बढ़ाना है?
रात हो भीषण अंँधियारी
प्रातः काल रोशनी होती है।
सत्य की सदा होती विजय,
और!असत्य की हार होती है!!
सुषमा सिंह*उर्मि,,
कानपुर




