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अलमारी में रखे पुराने खत :–

अलमारी में रखे पुराने खत :–
आज अलमारी में रखे पुराने खत देखे।
भूली मधुर सुहानी यादों की आगत देखे।
कोई नाना के खत तो कोई दादा के खत,
असीमित निश्छल स्नेह की देते आहट देखे।
बाबूजी के खत उसमें उनकी साहित्यिक भाषा,
जो करते रहते मुझे हमेशा उपकृत देखे।
माँ के वो खत तो सारी ममता उडेल देते,
दिखते माँ के अश्रु जो बिदाई के वक्त देखे।
प्रियतम के खत जो मुझे सगाई के बाद लिखे,
आज भी मेरे दिल को करते अनुरक्त देखे।
बेटियों के खत जो मेरे जन्मदिन पर आते,
यादें वही बचपन की करती मन तृप्त देखे।
मेरी छात्राओं के खत जो अभी तलक आते ,
करते ‘सुलभ’ उत्तरदेय के प्रति जाग्रत देखे।
सुभाषिनी जोशी ‘सुलभ’
इन्दौर मध्यप्रदेश




