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गुरु पूर्णिमा पर ‘गुरु दक्षिणा’ या ‘शिक्षकों का शोषण’? मैहर में नोवेल सोशल फाउंडेशन की ‘टीचर दीदी’ योजना पर उठे गंभीर सवाल

गुरु पूर्णिमा पर ‘गुरु दक्षिणा’ या ‘शिक्षकों का शोषण’? मैहर में नोवेल सोशल फाउंडेशन की ‘टीचर दीदी’ योजना पर उठे गंभीर सवाल

 

 

गुरु पूर्णिमा… वह दिन जब पूरे देश में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान देकर उनका सम्मान किया जाता है। लेकिन मैहर में इसी पर्व के बीच एक सवाल तेजी से उठ रहा है—क्या ‘टीचर दीदी’ बनकर बच्चों का भविष्य संवारने वाली महिलाओं को मात्र ₹3,000 प्रतिमाह देकर उनके सम्मान के साथ न्याय किया जा रहा है?

 

जिले में CSR और DMF मद से संचालित कार्यों को लेकर पहले ही पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। अब इन सवालों के केंद्र में नोवेल सोशल फाउंडेशन और उसकी ‘6 टीचर दीदी’ योजना भी आ गई है।

 

जानकारी के अनुसार, CSR मद से 6 आंगनवाड़ी केंद्रों के रेनोवेशन का कार्य नोवेल सोशल फाउंडेशन को सौंपा गया था। इसी परियोजना के अंतर्गत इन छह आंगनवाड़ी केंद्रों में 6 ‘टीचर दीदी’ की नियुक्ति किए जाने की बात सामने आ रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि इन नियुक्तियों की प्रक्रिया क्या थी? चयन किस आधार पर किया गया? क्या इसके लिए सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया था? और क्या समूची प्रक्रिया शासन के निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनाई गई?

 प्रश्न मानदेय को लेकर है। यदि इन टीचर दीदियों को वास्तव में ₹3,000 प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है, तो यह राशि किस नियम, आदेश या स्वीकृति के आधार पर निर्धारित की गई? क्या यह कलेक्टर द्वारा निर्धारित दरों अथवा संबंधित विभाग के मानकों के अनुरूप है? यदि नहीं, तो इसका औचित्य क्या है?

गुरु पूर्णिमा पर मंचों से गुरु के सम्मान की बातें करना आसान है, लेकिन वास्तविक सम्मान तब होगा जब शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं को उनके श्रम के अनुरूप सम्मानजनक पारिश्रमिक मिले। यदि योग्य शिक्षिकाओं से नियमित जिम्मेदारियां लेकर उन्हें अत्यंत कम मानदेय दिया जा रहा है, तो यह गंभीर सार्वजनिक विमर्श और प्रशासनिक समीक्षा का विषय है।

 

अब आवश्यकता है कि नोवेल सोशल फाउंडेशन, संबंधित विभाग तथा जिला प्रशासन इन सभी प्रश्नों पर स्पष्ट जवाब दें। यदि सभी नियुक्तियां, भुगतान और कार्य आवंटन नियमानुसार हुए हैं, तो संबंधित स्वीकृतियां, अनुबंध और मानदेय संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। यदि कहीं कोई अनियमितता पाई जाती है, तो निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

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