राखी की डोर

# राखी की डोर#
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धागा मेरा विश्वास का सदा बनाए रखना… भाई !
अटूट स्नेह के बंधन को सदा बनाए रखना …. भाई !
तुम हृदय !
मैं प्राण !
दोनों का भाव प्रवाह बढ़ाते रहना…. भाई!
इस जीवन की एक डोर से बंधे हम तुम !
इस डोर को बनाए रखना… भाई !
जिस बंधन को बांध कर सुभ्रदा श्री कृष्ण की बनी सहोदरा….
उसी बंधन को बांध कर मैं भी हूं तुम्हारी सहोदरा….
भाव वैसा ही रखना… भाई
श्रीकृष्ण सा रक्षासूत्र की मान सम्मान बनाए रखना…. भाई !
बहन सुभ्रदा के जीवन के कमजोर डोर को सदा निभाते श्री कृष्ण !
द्रौपदी की एक गुहार पर दौड़े चले आए थे श्री कृष्ण !
मैं तो बोल नहीं पाऊंगी….
तुम हृदय भाव समझ जाना… भाई!
हृदय गति मेरी जब रुक जाए इस बंधन तभी मिलेगा छुटकारा तुम्हें मेरे भाई !
अनमोल उपहार देते हो मुझको…..
अपना वचन निभाते… रहना
सुख – दुःख जीवन में आते रहेंगें…
हमदोनों मिलकर पावन रिश्ता निभाते रहेंगे…
एक दूसरे के प्रति सदा मान सम्मान रखेंगे…
इस वचन को कच्चे सूत में पिरोकर तेरे कलाई को सजा रखी हूं !
लाल टीका से भाल को शुभ आशीष दे रही हूं !
तेरा भाल !
मेरा सौभाग्य !
सदा अमर रहे मेरे भाई !
धागा ये विश्वास का ……
स्नेह प्रेम के आधार का …..
हृदय में अमृत धार का ……
यम और यमुना के भाव का …..
सदा बनाए रखना ….. भाई !!
अपने भाई की बहना
तेरी प्यारी श्यामा बहना …
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुम्बई




