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विषय:- तू मेरा मैं तेरा

जीव कहे शिवजी तू मेरा मैं तेरा

विषय:- तू मेरा मैं तेरा

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  जीव कहे शिवजी तू मेरा मैं तेरा

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पहले नादानी में ही कहता था,

ऐ प्रिये सुनो तो तू मेरा मैं तेरा।

प्रेम में आलिंगन करते कहती,

सुन मेरे साजन तू मेरा मैं तेरा।।

 

प्यार हो गया हम दोनों में फिर,

लिए हमने मिलके सात फेरा।।

सात वचन आपस में दे लेकर,

पहली रात लगा तू मेरा मैं तेरा।।

 

जवानी के नशे में चूर थे दोनों,

माया मोह ने था दोनों को घेरा।

सदा घर एक मंदिर सा लगता,

कहते आपस में तू मेरा मैं तेरा।।

 

नन्हा बच्चा किलकारी ले आया,

रहा गोदी और बिस्तर का फेरा।

सारा ध्यान उसपर चला गया था,

माॅंं बन वो कहती तू मेरा मैं तेरा।।

 

मुझे भी ये दृश्य देख लगता था,

कैसे जीवन को माया ने है घेरा।

देवकी-यशोदा के कृष्ण कन्हैया,

पर राधा कहती हैं तू मेरा मैं तेरा।।

 

सावन-मनभावन झूला पर्व है ये,

देखो न आनन्दमय साॅंझ-सबेरा।

शिवमय हो गया सभी शिवालय,

जीव कहे शिवजी तू मेरा मैं तेरा।।

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स्वरचित मौलिक रचना संग

सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”

हथखोज / देमार (पाटन)

तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़ 

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