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जब दो सखी आपस में मिलती है तो कहती हैं कि….

जब दो सखी आपस में मिलती है तो कहती हैं कि….

     !! सुनो..री सखी !!

सावन ….. लगे सुहावन!

कजरी ..तीज… मनभावन… ना !!

हर्षित मेघ जल बरसाए…

बुंद बन कर शीतलता लाए

गाए मेघा गीत मल्हार

मन में प्रेम अनुराग जगाए.. ना !!

सुनो …. री …सखी..

सावन लगे सुहावन !

कजरी तीज मनभावन… ना!!

गौरी माँ को हम भी मनाए

दे ..दो . मैया…शिव जैसा …. अमर सुहाग !

गणपति को हम गोद खेलाए !

भांग धतुरा शिव को चढ़ाए !

सावन मोरा मन भाये सखी री !

धरा अम्बर हरियाली छाए

माँ भी मुझको ..नैहर बुलाए ….

आएगा छोटा भैया लिवाने

बाबा बैठे द्वार निहारे…

बहना सखी मिल झुला डाले

बिन पिया हम कैसे जाए …. ना!!

मेंहदी रच रच हाथ सजाए !

मीरा जैसे कृष्ण बुलाए !

हम अपने पिया को बुलाए !

  बिन उनके सावन ना भाए !

प्रीत प्रेम में भींगे आंचल,

बार बार मन उन्हें बुलाए … ना

सूनो … री …. सखी

सावन ..लगे …सुहावन 

कजरी ….तीज ….

बड़ा ..मन भावन… ना

सूनो .. री.. सखी….

✍🏻 श्यामा 💚 अपने कजरी गीत से सावन की झड़ी सजाए …. ना !!

      श्यामा प्रभाकर दास

         मुम्बई

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