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गुरु पूर्णिमा

नमन मंच 

दिनांक 29.7.26

 

गुरु पूर्णिमा

 

गुरु साक्षात् परब्रह्म 

तस्मै श्री गुरुवे नमः 

 

गुरु बिना ज्ञान नहीं,

ज्ञान बिना गति नहीं।

 

आषाढ़ मास की धवल पूर्णिमा पर

गुरु-शिष्य का पावन मिलन होता है।

संसार-सागर से पार लगाने वाले

गुरु ही कुशल खिवैया होते हैं।

 

जीवन को उच्च आदर्शों का पथ दिखाने वाले,

विवेक और प्रकाश के पुंज गुरु ही

ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप हैं।

 

गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व

संवेदनाओं, श्रद्धा और कृतज्ञता का व्रत है।

यह गुरुजनों के प्रति सम्मान,

पूर्ण समर्पण और स्नेह व्यक्त करने का महोत्सव है।

 

गुरु ही परब्रह्म के ज्ञाता हैं।

वे ईश्वरतुल्य ज्ञान देकर

हमारे जीवन को कृतार्थ बना देते हैं।

 

वे अज्ञानरूपी तम का नाश कर

जीवन को ज्ञान के आलोक से भर देते हैं।

जो गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान रखता है,

उसके कर्म अनुपम बन जाते हैं,

और उसका जीवन सफल एवं सार्थक हो उठता है।

 

अमिता मराठे 

इंदौर मध्य-प्रदेश

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