तुलसीदास जी

नमन_मंच🙏
दिनांक_19/08/2026
स्वरचित
तुलसीदास जी
राजापुर की धूल से उठकर, काशी तक जिसकी कीर्ति गई,
भटकते जीवन की पीड़ा, राम-भक्ति में आकर ढल गई।
जिन अधरों पर था राम-नाम, वही लेखनी अमर हो गई,
‘मानस’ की चौपाइयों में जन-जन की आत्मा मुखर हो गई।
अवधी की माटी को देकर, तुलसी ने वैभव अनुपम दिया,
भक्ति, नीति, करुणा, मर्यादा-हर भाव को अक्षर-तन दिया।
‘विनय पत्रिका’ में विनय बनी, ‘कवितावली’ में भाव प्रखर,
उनकी वाणी आज भी बहती, जैसे सरयू की निर्मल लहर।
हे तुलसी! आपकी लेखनी मेरे मन का दीपक बन जाती है,
हर चौपाई में जीवन की कोई अनकही सीख मिल जाती है।
आपने राम को केवल लिखा नहीं, जन-हृदय में उतार दिया,
मेरी श्रद्धा ने आज आपके चरणों में अपना संसार दिया।
जयंती पर शत-शत नमन उस अमर साहित्य-साधक को,
जिसने शब्दों में राम रचे और अमर कर दिया भारत के लोक को।
नीलचित्रा व्यास (चित्रलेखा व्यास)
उदयपुर,राजस्थान




