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बूंद ने लिखी प्रेम की पाती

बूंद ने लिखी प्रेम की पाती
बूंद ने लिखी प्रेम की पाती,
मेघों ने संदेश सुनाया।
भीगी-भीगी पवन चली जब,
मन ने मधुर राग सुनाया।टप-टप बूंदें छत पर बरसीं,
जैसे पायल छन-छन बाजे।
माटी की सौंधी खुशबू लेकर,
सावन मन के द्वार विराजे।नीले नभ पर बादल छाए,
धरती ने श्रृंगार किया।
सूनी डालों ने मुस्काकर,
फूलों का सत्कार किया।बूंद-बूंद में प्यार घुला है,
बूंद-बूंद में भाव समाया।
तन-मन भीगा प्रेम-रंग में,
सावन ने उत्सव मनाया।आओ पढ़ लें बूंद की पाती,
जिसमें स्नेह अपार है।
प्रकृति कहे मुस्काकर हमसे,
प्रेम ही जीवन का सार है।स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




