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सावन में तिरंगा का अलख जगाने आया है

सावन में तिरंगा का अलख जगाने आया है ।
सावन की भींगी रूत से शीतलता लेकर आया है ।
सावन में तिरंगा कि तिरंगा में सावन ये आत्मबोध कराया है।
दोनों ही एक दूसरे के पूरक, बिना एक दूसरे के न भाया है।
सावन की हरियाली को तिरंगा के रंग में पाया है।
बादल जैसे साफ आसमान सफेद रंग में आया है।
बिजली सी कड़कती जोर का शौर्य दिखलाने केसरिया चमक लामा है।
सावन के पावन में तिरंगा लहराया है।
तिरंगा में पावन सावन का मन हर्षाया है।
सावन में तिरंगा और तिरंगा में सावन मन में प्रेम जगाया है।
देशप्रेम संग प्रकृति भी हर्षित होकर लहलहाया है।
समृद्धि की ओर अग्रसर होते देश भक्ति जगाया है।
सावन में तिरंगा और तिरंगा में सावन नारा हर हर महादेव का लाया है।
सावन में तिरंगा और तिरंगा में सावन अलख जगाने आया है।
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुम्बई




