E-Paperसाहित्य रचना

सावन में नाग देव पूजा

सावन में नाग देव पूजा

 

बादल गरजे, धरती महके,अब 

सावन मास आया है  

धरती पर नाग देवता बिलों से निकल आया है ।

 

श्रावण का महिना,वर्षा की बूंदों की फुहार,

दूध, फूल से पूजा करते,नाग पंचमी का त्योहार।

 

श्रद्धा से चढ़ाएं बेल-पत्र,गूंथे प्रेम से फूलों के हार,

नाग पंचमी में हल्दी-कुमकुम से सजे हुए हैं दरबार।

 

सावन में झूमे नाचे,सजे खेत खलिहान हरे-भरे ,  

घर-आंगन,गली चौबारे, उमंग उत्साह खुशियों से भरे।

 

सावन में नाग धरती पर, भोले नाथ के हार बन जाते, 

जो श्रद्धा से दूध चढ़ाये,नाग देव हर संकट मिटाते।

 

प्रकृति के रखवाले नाग, खेतों की रखवाली करता,

जिनके सिर पर टिकी है धरती आशीष दे, खुशियां भरता।

 

श्रीविष्णु जी की शय्या है जो, हम सबकी रक्षा करें,

नागपंचमी के दिन सबपर,नाग देव की कृपा बरसे।

 

 चन्द्रकला शर्मा प्रधानाध्यापिका 

बेमेतरा छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!