भोले भंडारी की महिमा

भोले भंडारी की महिमा
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शिव ही आदि शिव ही अंत,
शिव ही तो ब्रह्माण्ड है।
सारे जग में शंकर जी की,
होती महादेव जयकार है।।
दूब-शमी प्रभु को है प्यारी,
गंगा जल प्रभु पे बलिहारी।
सच्चे मन से जो करता सेवा,
पूर्ण मनोरथ करते देवा ।।
सच्चे मन से जो भी ध्याता,
सदाचार अरू संयम पाता।
नित-नित बढ़ती जीवन आशा,
कटे मनुज की घोर निराशा।।
शिव की भक्ति में सुख पाया,
उर में अति आनन्द समाया।
शिव की महिमा है अति पावन,
देती सुख उर को मनभावन।।
कृपा तुम्हारी सभी है पाते,
काम सफल प्रभु सब हो जाते।
मुझको देना भोले नाथ सहारा,
पल-पल जपूं में नाम तुम्हारा।।
हाथ जोड़ कर विनती करती,
चरणों में प्रभु माथा धरती।
बना रहे आशीष तुम्हारा ,
जीवन धन्य हो जाए हमारा।।
हे त्रिपुरारी!नाथ महेश्वर,
प्रभु मुझको दरश दिखाओ।
माया में अटकी पथ भटकी,
आकर प्रभु पार लगाओ।।
सुषमा सिंह*उर्मि,,
कानपुर




