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स्वतंत्रता दिवस”

“स्वतंत्रता दिवस”
न जाने कितने वीरों ने,
अपनी जान गवाई थी,
तब जाकर मेरे भारत ने,
सही स्वतंत्रता पाई थी।
यह धरती भी हमारी थी, आकाश भी हमारा था,
पर ब्रिटिश के शासन में,
कुछ भी ना हमारा था,
मंगल ,भगत, आजाद
सब ने लड़ी लड़ाई थी,
तब जाकर मेरे भारत ने,
सही स्वतंत्रता पाई थी।
एक समय था जब ये भारत,
“सोने की चिड़िया”कहलाता था,
यही देखकर इसे विदेशी,
हर बार हथियाना चाहता था।
अंग्रेजों के छक्के छुड़ाकर,
लक्ष्मी बाई ने जान गवाही थी,
तब जाकर मेरे भारत ने,
सही स्वतंत्रता पाई थी।
सही स्वतंत्रता पाई थी।।
जय हिंद ,जय भारत।।
श्वेता ईनाणी,उदयपुर, समाज सेविका, लेखिका लेखिका




