दाऊ साहब श्री शिव मोहन सिंह : राष्ट्रसेवा और जनसेवा की अमिट विरासत
पुण्यस्मरण एवं विनम्र श्रद्धांजलि

दाऊ साहब श्री शिव मोहन सिंह : राष्ट्रसेवा और जनसेवा की अमिट विरासत
पुण्यस्मरण एवं विनम्र श्रद्धांजलि
दाऊ साहब, स्वर्गीय श्री शिव मोहन सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने जीवनकाल में केवल पद और प्रतिष्ठा अर्जित नहीं करते, बल्कि अपने कर्मों से ऐसी विरासत छोड़ जाते हैं, जिसे समय भी धुंधला नहीं कर पाता। दाऊ साहब श्री शिव मोहन सिंह जी भी ऐसी ही विराट शख्सियत थे। एक पत्रकार की दृष्टि से उनके जीवन को देखें तो यह केवल एक पूर्व पुलिस अधिकारी या राजनेता की जीवनगाथा नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा, अनुशासन, साहस, संवेदनशीलता और जनसेवा के मूल्यों से निर्मित एक प्रेरक अध्याय है।
अखिल भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में दाऊ साहब ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन असाधारण समर्पण के साथ किया। चीन युद्ध के समय असम से लेकर भारत-पाक युद्ध के दौरान कश्मीर में मध्यप्रदेश विशेष सशस्त्र बल की बटालियन का नेतृत्व करना उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचायक रहा। वर्ष 1985 में राजीव-लोंगोवाल समझौते के चुनौतीपूर्ण दौर में पंजाब में IG, CRPF के रूप में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इसके बाद CRPF में ADG के दायित्व का निर्वहन करते हुए वर्ष 1986 में DG पद तक पहुँचना उनके गौरवपूर्ण सेवाकाल का प्रमाण है।
लेकिन दाऊ साहब की पहचान केवल वर्दी तक सीमित नहीं थी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन को अपनाया और वर्ष 1998 से 2003 तक अमरपाटन के विधायक के रूप में जनता की सेवा की। राजनीति में रहते हुए भी उनके व्यक्तित्व में पद का अहंकार नहीं, बल्कि जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई देती थी। वे जनता के बीच सहजता से घुल-मिल जाने वाले ऐसे जनप्रतिनिधि रहे, जिनके लिए राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प थी।
एक पत्रकार के रूप में जब हम किसी व्यक्ति के सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन करते हैं तो उसके पद से अधिक महत्वपूर्ण उसके कर्म, व्यवहार और समाज पर छोड़ी गई छाप होती है। इस कसौटी पर दाऊ साहब का जीवन अत्यंत समृद्ध दिखाई देता है। राष्ट्र की सुरक्षा से लेकर लोकतांत्रिक जनसेवा तक उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
और एक पुत्र की दृष्टि से देखें तो दाऊ साहब का सबसे बड़ा परिचय उनका पिता होना था। उनके संस्कार, अनुशासन, संघर्षशीलता और जनसेवा की भावना परिवार के लिए अमूल्य धरोहर हैं। उनके दिए संस्कारों ने आने वाली पीढ़ी को जीवन में आगे बढ़ने के साथ-साथ समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा दी।
विंध्य की धरती दाऊ साहब को केवल एक पूर्व पुलिस अधिकारी, प्रशासक या विधायक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे आदर्श पुरुष के रूप में याद करती रहेगी, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा राष्ट्र और समाज की सेवा में समर्पित किया।
पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण करना केवल एक दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उन जीवन-मूल्यों को नमन करना है, जिन्हें उन्होंने अपने आचरण से स्थापित किया।
व्यक्ति देह से विदा होता है, लेकिन उसके कर्म, संस्कार और आदर्श समाज की स्मृतियों में सदैव जीवित रहते हैं।
दाऊ साहब श्री शिव मोहन सिंह जी की पुण्य स्मृतियों को शत-शत नमन।
विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।




