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मंगला गौरी सावन मास

मंगला गौरी सावन मास

 

सावन आया, बूंदें बरसीं,  

हरियाली ने चूनर ओढ़ी।  

सोलह सोमवार कथा चली,  

मंगला गौरी व्रत पूजा जोड़ी।

 

कुंवारी कन्या,सुहागिन नारी की,

पूरी होती हर मन की आस।

मंगला गौरी की पूजा करते,

पूरी भक्ति श्रद्धा, विश्वास।

 

पीली साड़ी, हरे-हरे श्रृंगार,  

मंगला गौरी खुश हो वर दे।  

हाथ में कमल, माथे पर बिंदी,  

घर-आंगन में खुशियां भर दे।

 

सोलह दिन का व्रत है प्यारा,  

सोमवार को विशेष है पूजा।  

फूल, बेलपत्र, दीप, धूप से,  

माँ को भोग लगाती दूजा।

 

कहते हैं जो सच्चे मन से,  

मंगला गौरी को जो ध्यावे।  

उसके घर में कभी ना घटे,  

धन-धान्य, सुख सुहाग बढ़ावे।

 

हे मंगला गौरी, सावन की रानी  

तेरी कृपा से हरा घर आंगन।  

बेटी को अच्छा घर वर देना,  

बहू के आंचल कर दो चंदन।

 

शिव-पार्वती का जोड़ा अमर , 

वैसी हर जोड़े में प्यार रखना।  

सावन की हरियाली की जैसे  

जीवन में हर खुशियां भरना।

 

  चन्द्रकला शर्मा प्रधानाध्यापिका

 छत्तीसगढ़

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