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मेरा देश

 

मेरा देश

मेरा देश महान, सबसे सुंदर,
सबसे विकसित, सबसे चहकदार।
यह त्याग और बलिदान की धरा मनोहर,
रहें सभी भाई-भाई, प्रेम में बँधकर।

सागर है भारत को घेरकर,
ऊँचा हिमालय खड़ा प्रहरी बनकर।
देश की नींव बहुत गहरी, भारत का सिरमौर,
यहाँ सब रहते अनेकता में एकता रखकर।

न किसी से नफ़रत, न किसी से बैर,
देश का नाम ऊँचा करें, तन-मन-धन देकर।
देश की उन्नति करें, भेदभाव छोड़कर,
यहाँ की सभ्यता और संस्कृति बहुत पुरानी है।

देश के चारों ओर चाँद लगे, सब मिलकर,
देश की उन्नति करें सब मिलकर।
यहाँ के लोग संघर्ष के लिए रहते तत्पर,
यहाँ की शिक्षा व्यवस्था गुणवत्तापूर्ण और सुंदर।

यहाँ हर पर्व मनाते मिल-जुलकर,
इस देश की शान सबसे रहे ऊपर।

— नीलम प्रभा सिन्हा

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