E-Paperगीत

शीर्षक:–बटोही

विधा:–गीत

 

शीर्षक:–बटोही
विधा:–गीत

माँझी पुकारे चल रे बटोही
किन सपनों में खोया हुआ
रैन नहीं अब रैन नहीं।
ध्येय से कभी विमुख न होना
मंजिल से पहले रुक नहीं जाना
चलना ही लिखा है नियति
चलते ही …रहना बटोही
चलते ही रहना।
माँझी पुकारे चल रे बटोही।
किन सपनों में खोया हुआ
रैन नहीं अब रैन नहीं।।

कदम भले ही थक जायें
प्यास कभी न बूझने देना
प्यास तेरी जो बूझ जाएगी
कदम कभी न फिर चलेंगे।।
चलना ही लिखा है नियति
चलते ही…रहना बटोही
चलते ही रहना
माँझी पुकारे चल रे बटोही
किन सपनों में.. किन सपनों में खोया हुआ
रैन नहीं अब रैन नहीं।।
माँझी पुकारे चल रे बटोही
चल रे बटोही चल रे बटोही….

स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!