विधा कविता मेरा भारत देश

दिन शनिवार
दिनांक 08/08/26
विधा कविता मेरा भारत देश
मेरा भारत देश महान।
हमारे प्राणों का प्राण।
तिरंगा झंडा है हमारी शान।
हमारा भारत देश है महान।
गंगा यमुना की बहती कल-कल धारा है।
शीष मुकुट बना हिमालय
गंगा चरण पखारती,
विश्व बंधुत्व कायम हो,
यही हमारा नारा है।
भेद भाव यहाँ न हो,
रक्षा हर प्राणी की हो;
यही संकल्प हमारा है।
कोई भी प्राणी भूखा ना सोयें।
बिन चिकित्सा स्वजन न खोयें।
रहे ध्यान हमारा,
हर नागरिक की न्युनतम् आवश्यकताओं की पूर्ति हो।
नैतिकवादियों में ऐक्य, धरती पर फैली हरियाली हो।
सौहार्दपूर्ण रहे सभी, बैमनस्य नहीं, मित्रता गहरी हो।
आतंकियों की है आँख लगी, बाँकुड़े सीमा के प्रहरी हों।
हर सर पत छत, तन पर वस्त्र सुशोभित हों।
इतने साल झेले हम, अब आर्थिक आजादी हो।
हो जागृति घर घर में, शुभ्रचेतना अंकुरित हो।
प्राकृतिक संसाधनों की जन-जन को उपलब्ध हो।
देश के लिए मर मिटने की आज हमने ठानी है।
पाक चीन की औकात है क्या? ब्रह्मोसों की तैनाती है।
विश्व गुरु बनेगा भारत ये महासंकल्प हमारा है।
मेरा भारत देश हुआ संकुचित आक्रमणों से,
मानचित्र आर्यावर्त का उभरेगा धरा धाम पर;
ऋषिमुनियों की वेदों में लिखी यही आप्त वाणी है।।
पुष्पा निर्मल,
बेतिया बिहार,




