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राष्ट्रवाद से मिले सभी मुकाम

 

विषय:-
राष्ट्रवाद से मिले सभी मुकाम
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*कवि लिखें शिक्षा हो समान*
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कवि वही जो कविता लिखे,
जो लिखे धारण किए दिखे,
एक उंगली समाज की ओर,
तीन उंगली से संवरना सीखे।

वेद-पुराण,शास्त्र दिए खास,
ओ हैं महान महर्षि वेदव्यास,
महाकाव्य रचयिता भारत के,
जिनसे धर्म रक्षित चहुॅं वास।

कविता मुख्य प्रबंधन साधन,
भजन बने तो होत आराधन,
छल-कपट-प्रपंच मुक्त होके,
आनन्द मिलते कटे भवबंधन।

कविता में समाहित संस्कार,
पढ़ संस्कारी बनते हैं परिवार,
पाश्चात्य अपना हुए हैं बेहाल,
शांति को तड़प रहा है संसार।

कवि लिखें कविता संस्कारी,
अगर सुधारना हैं दुनियादारी,
कवि और साहित्य महत्वपूर्ण,
निभाऍं वे सशक्त जिम्मेदारी।

कवि-लेखक हैं साहित्यकार,
लें न्याय व्यवस्था के सरोकार,
अन्याय नही हो किसी से भी,
ये गुहार लगाऍं बस बारंबार।

झोली भरना है ये कैसा काम,
साहित्यकार नहीं चाहते नाम,
राष्ट्रवाद हो प्रथम धर्म हमारा,
इसी में सुरक्षित सभी मुकाम।

कवि लिखें शिक्षा हो समान,
नीति एक स्वस्थ्य रहें इंसान,
भेद-भाव मिटे रामराज्य हेतु,
ये सरकार अवश्य ले संज्ञान।
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स्वरचित मौलिक रचना संग
सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”
हथखोज देमार (पाटन)
तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़
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