15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवसE-Paperसाहित्य रचना

वीर सपूत

साहित्य दर्पण हेतु 

वीर सपूत

 

वीर सपूतों को शत-शत नमन, जिन्होंने देश पर प्राण लुटाए।

मातृभूमि की रक्षा में, हँसते-हँसते शीश चढ़ाए।

आज भी उनकी गाथाएँ, भारत का गौरव गाती हैं।

उनकी वीरता की स्मृतियाँ, नम आँखें कर जाती हैं।

शहीद वंदन, अभिनंदन—हर भारतवासी का धर्म बने।

उनके त्याग से देशप्रेम का, जन-जन में संकल्प जगे।

सीमा पर जो डटे रहे, वे भारत की ढाल बने।

उनकी कुर्बानी से ही हम, स्वतंत्रता के लाल बने।

वर्तमान प्रासंगिकता यही—बलिदान कभी व्यर्थ न हो।

राष्ट्रहित से बढ़कर अपना, कोई स्वार्थ समर्थ न हो।

उनकी सीख हमें देती है, कर्तव्य-पथ पर बढ़ते रहना।

संकट आए चाहे जितना, सत्य-धर्म पर अडिग रहना।

देश की एकता-अखंडता को, जीवन-मूल्य बनाना है।

वीर सपूतों के सपनों का, भारत हमें बनाना है।

नफरत की हर दीवार गिराकर, प्रेम-दीप जलाएँ हम।

कर्तव्य, करुणा, त्याग भाव से, राष्ट्रधर्म निभाएँ हम।

आजादी की कीमत समझें, इसका मान बढ़ाएँ हम।

शहीदों के पावन सपनों को, जन-जन तक पहुँचाएँ हम।

नम आँखों से शीश झुकाकर, वीरों का सम्मान करें।

उनके आदर्शों को अपनाकर, भारत का जयगान करें।

 

डॉ राम शरण सेठ 

छटहाॅं मिर्जापुर उत्तर प्रदेश

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