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तिरंगे में सावन

तिरंगे में सावन

 

तिरंगे में सजा सावन, निराला रंग लाया है,

हरी धरती ने केसरिया, नवल श्रृंगार पाया है।

 

गगन में श्वेत बादल हैं, तिरंगा मुस्कुराता है,

वतन की आन का संदेश, हर बूँद सुनाता है।

 

हरी चूनर धरा ओढ़े, खुशी से झूमती हरियाली,

केसरिया रंग वीरों का, सुनाता गाथा मतवाली।

 

श्वेत रंग शांति का दीपक, हृदय में प्रेम भरता है,

तिरंगा देशभक्ति का, सभी के मन में रहता है।

 

बरसती बूँद कहती है, वतन से प्यार करते हैं,

शहीदों की अमर गाथा, सदा हम याद करते हैं।

 

मयूरों के मधुर नर्तन, प्रकृति का गीत गाते हैं,

तिरंगे की छटा देखी, तो बादल भी मुस्काते हैं।

 

सावन की फुहारों में, तिरंगा और प्यारा है,

यह भारत माँ के माथे, चमकता एक सितारा है।

 

नदियाँ गाएँ देशगान, पवन भी गीत गाता है,

तिरंगे को नमन करके, हृदय गौरव से भर जाता है।

 

हरी खुशियाँ, श्वेत शांति, केसरिया बलिदान है,

तिरंगा भारत माता की, सदा पहचान है।

 

सावन और तिरंगे का, यही अनुपम नाता है,

प्रकृति संग देशप्रेम का, नया संदेश आता है।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘ सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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