E-Paperसाहित्य रचना

शीर्षकःसावन मे तिरंगा और तिरंगा मे सावन

शीर्षकःसावन मे तिरंगा और तिरंगा मे सावन

 

सावन लेके आया बारिश

बडे प्रतीक्षा से आया बारिश

सबकी आॅंखे आॅंसू से भरी थी।

सावन की पहली बारिश ने

धरती को हरे रंग का जोडा पहनाया,हरी चूडियां,बिंदी,मांग में सिंदूर,पायल,मेहंदी लगाई हाथों मे,

हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन ,

अटूट श्रध्दा,धैर्य और समर्पण से किया स्वीकार पत्नी का,

नारी सोलह श्रृंगार करके तीज की परंपरा गांवो,कस्बों में होती है।पेडों कें शाखाओं पर झूले झूलते है,सावन के गीत गाते है।

बेटियां तीज के अवसर पर मायके आती है।

मायके में बुलाकर कपडे,मिठाई,फल,श्रृंगार सामग्री उपहार देते है।

 

सावन के हरियाली में तिरंगा सजता है।

तिरंगा में सावन दिल खोल कर नाचता है।त्योहार मनाता है।

तिरंगा और हरा रंग का है विकास का नाता, सफेद रंग है सत्य,शांतति,पवित्रता,सौहार्दता का नाता,

केशरिया रंग त्याग,वीरता,शौर्य की याद दिलाता है।

गुलामगिरी के दुःख को हटाकर,शहीदों ने अपने रक्त से इस तिरंगा मे तीन रंग भरे है।

सावन में तिरंगा बहोत सजता है।हर घर घर पर लहरता है।

हर एक शहीदों के लिए दिल से पुकार होती है।श्रध्दाजंलि से दिल फुटफुट कर रोता है।

क्रांतिकारों के क्रांति से हम आजाद हुए।

धरती माॅं हरियाली से उनका स्मरण करती है।

बारिश की फुहारों सुजलाम् सुफलाम् करती है।

देशप्रेम,एकता,समानता ,न्याय ,संघटन से बलवान है।

तिरंगा फहरा के सलामी देते है।स्वतंत्रता दिवस उल्हास से देशभक्ति से सम्मान से मनाते है।

 सावन मे तिरंगा और तिरंगे मे सावन का नाता सृजन,निर्माण,विकास का है।

 

नामःअंजली सामंत

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!