E-Paperसाहित्य रचना
रंग बिरंगे होते मोर

रंग बिरंगे होते मोर
सुंदर-सुंदर नाच दिखाता
मोर सभी के मन को भाता
इसके होते रंग निराले
रंग-बिरंगे देखें भाले
इसके शीश कलगी होती
ऐसा लगता ,जड़ें हो मोती
राष्ट्रीय पक्षी यह कहलाता
जन-जन को बेहद यह भाता
इसकी आवाज सुखद निराली
सारे देख बजाते ताली
बारिश में यह छम छम नाचे
मधुरिम गीत लगे यह बांचे।
कभी पेड़ पर चढ़ जाता है
तभी पेड़ भी इठलाता है।
कृष्ण कन्हैया को भाता
उनका भी यह मुकुट सजाता
इनको हमको देना दाना
करे नहीं हम ,कोई बहाना।।
श्वेता ईनाणी,लेखिका ,उदयपुर




