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ॐ नम: शिवाय

ताटंक छंद 

ॐ नम: शिवाय

ताटंक छंद 

(16-14 यति,अंतमें222)

 

आज चलो शिव के चरणों में,श्रद्धा-सुमन चढ़ायेंगे ।

पाकर आशीर्वाद उन्हीं से,जीवन सफल बनायेंगे।

श्रावण है यह मास सुहावन, कर मनसे उनकी पूजा।

हैं शिव -शंकर सबके स्वामी,ना कोई उन सा दूजा।

 

गंगाजल से अभिषेक करें, बेलपत्री चढ़ायेंगे । 

ॐ नमः शिवाय जप करके, मनवांछित फल पायेंगे।

दीन-दुखी के कष्ट हरेंगे, करुणा-सागर भोले, 

भक्ति-भाव से शीश नवाकर, खुलें कृपा के द्वारे।

 

नीलकंठ सदा दीनदयालु, सबकी पीड़ा हरते हैं। 

भक्तों के संकट के पल में, बनकर ढाल उतरते हैं।

मन में श्रद्धा दीप जलाकर, चरण में शीश को धर दें, 

शिव की भक्ति में मन रंगकर, जीवन को सफल बना लें।

 

नंगे पाँव चले काँवड़िया,मन में शंभु समाया है।

धन्य हुआ है जीवन उसका ,जो शिव दर्शन पाया है।

संग चल रहे हैं जो राही ,उनको यह बतलायेंगे।

मन वांछित फल देने वाले,बाबा को हरषायेंगे।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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