नाग पंचमी की वंदना

नाग पंचमी की वंदना
नाग पंचमी का पावन पर्व, श्रद्धा दीप जलाता है,
नागराज के पूजन से, मन निर्मल हो जाता है।
धरती की गहरी गोद में, जीवन-चक्र सँभालें नाग,
प्रकृति-संतुलन के प्रहरी, पूजित हों ये फणिधर नाग।
शेषनाग के रूप में प्रभु की, महिमा जग में न्यारी है,
विष्णु चरण की सेवा करते, छवि उनकी अति प्यारी है।
दूध, पुष्प, अक्षत और धूप से, भक्त करें आराधन,
मन में करुणा, जीव-दया हो, यही रहे शुभ साधन।
विष धारण कर भी नाग हमें, संयम का संदेश सुनाते,
शक्ति मिले तो धर्म निभाएँ, जीवन-पथ को सदा सजाते।
नागदेव की कृपा बनी रहे, सुख-शांति घर में आए,
भय और संकट दूर हों सारे, शुभता जीवन में छाए।
प्रकृति-प्राणियों की रक्षा का, हम सब लें संकल्प,
नाग पंचमी दे मानव को, दया-धर्म का सुंदर विकल्प।
नागराज को शत-शत वंदन, शेषनाग को प्रणाम,
धरती के इन रक्षक देवों को, कोटि-कोटि प्रणाम।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




