तुम्हे देख कर अंकुरित प्रणय

तुम्हे देख कर अंकुरित प्रणय
तुम हो प्रथम किरण, जो मेरे जीवन में प्रकाश बनकर आए,
मैं सूखी डाली थी, तुमसे फिर हरियाली-सी छा जाए।
तुम्हें देख कर अंकुरित हुआ प्रणय,
मेरे हृदय-पटल पर भावनाएँ उज्ज्वल प्रकाश फैलाएँ।
तुम्हारी मधुर-मधुर मुस्कान देख कर मेरे मन में जागी,
स्वर्णिम आभा की एक नई चमक-सी।
लगन तुम्हारे संग लग बैठी — जो होगा, देखा जाएगा,
तुम्हें अपना मान बैठी — जो होगा, देखा जाएगा।
कहीं कुछ कहा नहीं, पर आँसू की हर बूँद,
तुम्हारी याद में हर पल छलकती रहेगी।
तुम ही हो मेरे कृष्ण, मेरे जीवन-धन, जो पल-पल याद आते,
सारा जग छोड़कर बस तुमसे ही मन जुड़ जाता।
अब न दिल में चैन है, न रातों को विश्राम मिलता,
हर पल तरसती मेरी आँखें, तुम्हें ही ढूँढ़ती रहतीं।
मैंने तुम्हें ही प्रियतम रूप में चाहा है,
क्या कहूँ, तेरी नशीली आँखों का यह असर है।
तुम्हें देख कर मेरे मन में अंकुरित प्रणय,
अब लहलहाने को विवश हो चुका है।
तेरी मीठी-मीठी अदाएँ देख कर,
मेरा यह अंकुरित प्रणय तुमसे मिलने को आतुर है।
कृष्ण की मुस्कान में ही वृंदावन की खुशबू झलकती है,
कृष्ण, तुम ही मेरी धड़कनों में बसते हो।
बेपनाह मुहब्बत के सिवा मेरे पास कुछ भी नहीं,
कृष्ण, मैं तेरी थी, हूँ और सदा रहूँगी।
तुम्हें देख कर मन मेरा पुलकित हो जाता है,
सारा जग भूल जाती हूँ, बस तुम्हारी ही याद आती रहती है।
नीलम प्रभा सिन्हा




